
सागर वंदे भारत भारत लाईव टीवी न्यूज रिपोर्टर सुशील द्विवेदी,8222072664 ,मोबाइल
आजकल के ज़माने में अगर किसी की सबसे ज़्यादा पूछ-परख है, तो वो है — मोबाइल फोन। अब राजा-महाराजे तो इतिहास के पन्नों में हैं, असली राजा तो अब जेब में रखा ये स्मार्टफोन है।
सुबह आँख खुले या न खुले, अलार्म तो मोबाइल ही लगाता है। ब्रश करने से पहले इंसान अपना चेहरा नहीं, मोबाइल का नोटिफिकेशन चेक करता है — कहीं दुनिया तो नहीं बदल गई रातों-रात?
पहले माँ कहती थी: “बेटा, रोटी खा लो!”
अब कहती हैं: “पहले मोबाइल नीचे रखो, फिर खा लो!”
शादी-ब्याह में पहले दूल्हा-दुल्हन को देखते थे, अब मोबाइल से उनकी रिल्स बनाते हैं। कुछ लोग तो इतने डिजिटल हो गए हैं कि घरवालों को व्हाट्सएप पर ‘गुड मॉर्निंग’ भेज कर समझ लेते हैं कि आज का फर्ज़ पूरा हो गया।
मोबाइल इतना स्मार्ट है कि इंसान को खुद सोचने की ज़रूरत ही नहीं रही। रास्ता पूछना हो — गूगल। खाना बनाना हो — यूट्यूब। हँसना हो — इंस्टाग्राम। रोना हो — फेसबुक पर स्टेटस डाल दो, चार लाइक मिलते ही सुकून आ जाता है।
और हद तो तब हो जाती है जब लोग बाथरूम में भी मोबाइल ले जाते हैं! अब भला वहाँ कौन-सी बिज़नेस डील करनी होती है?
मोबाइल ने रिश्तों को भी ऑनलाइन कर दिया है।
“लव यू” भेजा — डिलीवर हो गया।
“मिस यू” भेजा — सीन कर लिया।
अब सामने मिलने का वक़्त किसके पास है?
सच कहें तो, अगर मोबाइल एक दिन ग़ायब हो जाए, तो आधे लोग भूल जाएँगे कि आख़िरी बार असली ज़िंदगीमोबाइल महाराज की जय हो!
जियो, पर थोड़ा मोबाइल से दूर भी रहो

